दाम तो नां दे सको जे तां मंजूर करो
सुण दइआ सिंघ जो जो भेट मैं चड़ाऊंगा
पिता कटवाके जैसे खून की खिलाई होली
वैसे होली बेटों के खून से खिलाऊंगा
सिहरे कुरबानीओं के बांध कर, कर संग
मौत की घोड़ी बेटे आपने बिठाऊंगा
दो चमकौर में कटाऊंगा कटारों से
दो सरहंद की दिवारों में चिणाऊंगा
किसी तरफ माता और किसी तरफ बाप होगा
किसी तरफ बेटे कहीं महिलों को रुलाऊंगा
हाथ पे नां बाज होगा सीश पे नां ताज होगा
खुस गिआ राज होगा लावारिस कहिलाऊंगा
हूंगा इकेला और फिरूंगा जंगलों में
छाड के पलंग सेजा कांटो की बिछाऊंगा
माता का नां पिआर होगा बेटों का नां हार होगा
सुंना संसार होगा सांई गुण गाऊंगा
सुੱख के समेत सरबंस सभ भेट कीआ
अब तो पिलादो पाहुल सेवक कहिलाऊंगा