दाम तो नां दे सको जे तां मंजूर करो
सुण दइआ सिंघ जो जो भेट मैं चड़ाऊंगा
पिता कटवाके जैसे खून की खिलाई होली
वैसे होली बेटों के खून से खिलाऊंगा
सिहरे कुरबानीओं के बांध कर, कर संग
मौत की घोड़ी बेटे आपने बिठाऊंगा
दो चमकौर में कटाऊंगा कटारों से
दो सरहंद की दिवारों में चिणाऊंगा
किसी तरफ माता और किसी तरफ बाप होगा
किसी तरफ बेटे कहीं महिलों को रुलाऊंगा